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महात्मा गांधी के बाद उनके परिवार का क्या हुआ?

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नाम : मोहनदास करमचंद गांधी। उपनाम : बापू, संत, राष्ट्रपिता, महात्मा गांधी। जन्मतिथि : 2 अक्तूबर 1869। जन्म स्थान : पोरबंदर, गुजरात। विशेष : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अंहिसक और शांतिप्रिय प्रमुख क्रांतिकारी, जन्मदिन पर राष्ट्रीय अवकाश, भारतीय मुद्रा पर फोटो, सरकारी कार्यालयों में तस्वीर। बचपन से ही विद्यालयों में बच्चों को बापू के बारे में बताया जाता है और उनकी जीवनी रटाई जाती है। दे दी हमें आजादी बिना खडग़ बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल। गाना भी हिंदुस्तानियों की जुबां पर सुना जा सकता है। लेकिन नाम गुम जाएगा चेहरा ये नजर आएगा... कहावत आज बापू पर चरितार्थ होती दिख रही है। बस फर्क इतना है कि नाम गांधी जयंती पर याद आता है और चेहरा कभी कभार नोट को ध्यान से देखने पर दिखता है। इतनी जानकारी आज स्वतंत्र भारत में अधिकांशत : हर पढ़े-लिखे व्यक्ति को पता है।

गांधी की जीवनी बचपने में पढऩे के बाद हर वर्ष 2 अक्तूबर को राष्ट्रीय अवकाश वाले दिन भी गांधी से संबंधित कई लेख पढऩे को मिल जाते हैं। लेकिन महात्मा गांधी के बाद उनके परिवार का क्या हुआ? उनके कितने बच्चे थे? आज उनके परिवार के सदस्य जीवित भी हैं या नहीं? उनके परिवार की कितनी पीढिय़ां आज मौजूद हैं? वे क्या कर रहीं हैं? कहां हैं? कितने सदस्य हैं? जैसे तमाम सवाल हैं जिनका जवाब पढ़े-लिखे तो क्या विशेषज्ञों और पीएचडी धारकों को भी नहीं पता होंगे। लेकिन आज आपको बताते हैं महात्मा गांधी के परिवार की मौजूदा स्थिति के बारे में।

इंटरनेट की एक वेबसाइट की मानें तो बापू के पौत्र, प्रपौत्र और उनके भी आगे के वंशज आज विश्व में छह देशों में निवास कर रहे हैं। जिनकी कुल संख्या 136 सदस्यों की है। हैरानी होगी यह सुनकर कि इनमें से 12 चिकित्सक, 12 प्रवक्ता, 5 इंजीनियर, 4 वकील, 3 पत्रकार, 2 आईएएस, 1 वैज्ञानिक, 1 चार्टड एकाउंटेंट, 5 निजी कंपनियों मे उच्चपदस्थ अधिकारी और 4 पीएचडी धारी हैं। इनमें सबसे ध्यान देने योग्य बात यह है कि मौजूदा परिवार में लड़कियों की संख्या लड़कों से काफी ज्यादा है। आज उनके परिवार के 136 सदस्यों में से 120 जीवित हैं। जो भारत के अलावा अमेरीका, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और इंग्लैंड में रहते हैं।

बापू के बारे में : महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद्र और माता का नाम पुतलीबाई था। अपने परिवार में सबसे छोटे बापू की एक सबसे बड़ी बहन और दो बड़े भाई थे। इनकी सबसे बड़ी बहन रलियत, फिर भाई लक्ष्मीदास और भाभी नंद कुंवरबेन, भाई कृष्‍णदास और भाभी गंगा थीं।

बापू का परिवार : सबसे बड़े पुत्र हरिलाल (1888-18 जून 1948) का ब्याह गुलाब से हुआ। जबकि दूसरे पुत्र मणिलाल (28 अक्तूबर 1892- 4 अप्रैल 1956) की पत्नी का नाम सुशीला था। तीसरे पुत्र रामदास (1897-1969) की शादी निर्मला से हुआ। जबकि चौथे और अंतिम पुत्र देवदास (1900-1957) की पत्नी लक्ष्मी थीं।

वंशावली दूसरी पीढ़ी से

-  रामिबेन गांधी-कवंरजीत परिख
ए. अनसुया परिख-मोहन परिख
क. राहुल परिख-प्रभा परिख        ख. लेखा-नरेन्द्र सुब्रमण्यम
अवनी व अक्षय                    अमल

2. सुधा वजरिया-व्रजलाल वजरिया
क. मनीषा-राजेश परिख         ख. पारुल-निमेष बजरिया
नील व दक्ष                         अनेरी व सार्थक
ग. रवि वजरिया-शीतल वजरिया
आकाश व वीर

3. प्रबोध परिख-माधवी परिख
क. सोनल-भरत परिख        ख. पराग-पूजा परिख
रचना व गौरव                     प्राची व दर्शन

4. नीलम परिख-योगेन्द्र परिख
क. समीर परिख-रागिनी पारिख
सिद्धार्थ, पार्थ व गोपी

- कांतिलाल गांधी-सरस्वती गांधी
क. शांतिलाल-सुझान गांधी
अंजली, अलका , अनिता व एना

2. प्रदीप गांधी-मंगला गांधी
प्रिया व मेघा

-रसिकलाल गांधी

-मनुबेन गांधी-सुरेन्द्र मशरूवाला
1. उर्मि देसाई-भरत देसाई
क. मृणाल देसाई-आरती देसाई       ख. रेणू देसाई

-शांतिलाल गाँधी

-सीता गांधी-शशीकांत धुबेलिया

1. कीर्ति मेनन-सुनील मेनन
सुनीता

2. उमा मिस्त्री-राजेन मिस्त्री
सपना

3. सतीश धुपेलिया-प्रतिभा धुपेलिया
मीशा, शशिका व कबीर

-अरुण गांधी-सुनंदा गांधी
क. तुषार गांधी-सोनल गांधी       ख. अर्जना प्रसाद- हरि प्रसाद
विवान व कस्तूरी                         अनिष व परितोष

-इला गांधी-मेवालाल रामगोबिन
क. कृष गाँधी
ख. आरती रामगोबिन
ग. केदार रामगोबिन-मृणाल रामगोबिन
घ. आशा रामगोबिन
ड़. आशिष रामगोबिन-अज्ञात
मीरा व निखिल

-सुमित्रा गांधी-गजानन कुलकर्णी
1. सोनाली कुलकर्णी

2. श्रीकृष्ण कुलकर्णी-नीलू कुलकर्णी
विष्णु

3. श्रीराम कुलकर्णी-जूलिया कुलकर्णी
शिव

-कहान गांधी-शिव लक्ष्मी गांधी

-उषा गोकाणी-हरीश गोकाणी
1. संजय गोकाणी-मोना गोकाणी
नताशा व अक्षय

2. आनंद गोकाणी-तेजल गोकाणी

करण व अर्जुन

-रामचंद्र गांधी-इंदू गांधी
लीना गाँधी

-तारा भट्टाचार्य-ज्योति भट्टाचार्य

1. विनायक भट्टाचार्य-लूसी भट्टाचार्य
इण्डिया अनन्या, अनुष्का तारा व एंड्रीया लक्ष्मी

2. सुकन्या भरतराम-विवेक भरतनाम
अक्षर विदूर

-राजमोहन गांधी-उषा गांधी
1. देवव्रत गांधी
2. सुप्रिया गाधी

-गोपाल कृष्ण गांधी-तारा गांधी
1. अनिता गांधी
2. दिव्या गांधी
3. रुस्तम मणिया

Comments
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sushil_gangwar 2011-02-01 11:24:39

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Baapu raaj khatam chuka hai ..
sushil_gangwar 2011-02-01 11:29:05

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thanks
dhirendra 2011-02-02 00:48:14

शुक्र है कि आपने इस देश के असली गांधी के बारे में लोगों को बताने के लिए कुछ प्रयास किया और खास कर के उनके परिवार के बारे में बताने का काम किया...क्यूंकि अक्सर इस देश के अंदर जब बेइमानों की तारीफ में कसीदे पढ़ी जाती हैं तो मन इस तर्क के साथ उन कसीदो को स्वीकार कर लेता है कि आखिर गांधी बनने से क्या फायदा...लेकिन आज अगर गांधी जी की शहादत के 62 साल बाद कोई व्यक्ति गांधी जी के परिवार के बारे में बताना चाहता है तो समझ में आता है कि आखिर इस देश में गांधी होने का मतलब है क्या...समय के फेर ने गांधी का मतलब सत्ता पर काबिज गांधी परिवार से स्थापित कर दिया था...जिनका ना तो खून के स्तर पर गांधी से कोई रिश्ता है और ना ही विचार के स्तर पर......
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vinod k pandey 2011-02-02 11:28:03

Gandhi jee hi nahi ,aise aur bhi mahapurus ha jinke pariwar ke bare me kuchh pata nahi ha
mai chahunga ki aap aur mahapuruso ke bare me bhi likkhe
lakh likhane ko bahut bahut dhanyabad
thanks
mahesh yadav 2011-02-27 12:18:47

Aap ka bahut dhanyawaad apane ye jankariya hum tak pahuchai.
Bapu Ji
RITA 2011-03-31 14:52:01

KYA UNKA KOI BHI VANSHAJ INDIA MAI NAHI HAI......KAM SE KAM BAPU JI KOI VANSHAJ INDIA MEI HONA CHAHIYA.
About Gandhiji
janak bhatta 2011-04-02 07:22:29

It is useful for the study of Gandhiji and his family.Gandhi Said, "Geeta Kantha Karo". I think Bhagavadgeeta is our spiritual reference book.So that is greatest commandment of Gandhiji for me.
Anonymous 2011-04-30 14:23:48

:love: :0 ;)) :D
rankit patidar 2011-05-09 14:34:24

gadhi ji ki jai ho..........!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
rankit patidar 2011-05-09 14:35:04

bad

tiwari
Ambrish iwarit 2011-05-13 21:04:02

may ambrish tiwari ap ko suve kamana
a mere bapu
choudhary shravan khadav 2011-06-03 19:14:06

a me
hindu rajput
tribhuwan singh panwar 2011-06-05 13:46:18

i think mahatma gandhi femali is not history
Aur Bhi to Such hai.
our thought of the day 2011-08-31 15:54:40

Aur jara ye to batao. Gandhi ke un 9 aurto se kitne bachche hue jinke saath wah 60 saal tak Bramcharya ka practice karte the. Kya un 9 ka pata hai
अमूल्य ज्ञान.
Amit Upadhyay 2011-06-13 11:01:20

ये एक बहुत अच्छी जानकारी है उन् लोगों के लिए जो बापू को सचमुच जानना चाहते हैं.
अन्यथा गाँधी नाम का उपयोग कर न जाने कितने ही आडम्बरी इस देश में घूम रहें हैं.
massage for all
chetan pundir 2011-07-02 17:11:32

we don't want to know about that person whose family has fled from the country and life is being enjoyed. if some information about Bhagat singh's family are provided, you are requested to send me at e-mail (chetan.pundir70@gmail.com).
comrade
chetan pundeer
Gandhiji
TIJENDER SINGH 2011-07-14 23:03:31

:0

Gandhiji mahan the..............
Abdulla
Rajhans Kumar Deo 2011-07-31 21:17:53

Aapne ye nahin bataya ki Gandhi ji ke bade bete ne islam dharm swikar kar apna naam Abdulla rakh liya tha, isiliye Gandhi ji ne use chhod diya tha.
Gandhi ji matter
pratyush shukla 2011-08-02 01:02:56

Rajhans Kumar , apko yeh jankari kaha se hue ki Gandhi ji ke badey betey ne Islam dharam sweekar kar leya to unhoney usse chor diya , kisi par koe aaroop soch samajh kar thtayoo ke sath lagana chaye . ap yeh kahna chatey hai gnadhi galat thhey to sabit karey
Deepak pandey 2011-08-07 07:41:33

Acchi jankari ke liye shukriya.
Vichar apne-apne
RAJHANS KUMAR DEO 2011-08-12 12:01:58

Mujhe aap se do baten karni hai balki janni hai -: (1) Maine Gandhi ji par aarop nahin lagaya, koi bhi baat kahan se seekha ye sab jagah utna mahatvapurn nahin rahna chahiye, bajay iske ki hamne use jaan liya ya seekh liya. Fir aarop aap kise samajh rahe hain - unke bete ka ishlam dharm swikar kane ko ya unke bete ka islam swikar karne se Gandhi ji ko use chhod dene ko ? ( agar meri baat galat ho to mujhe kshma mangne me koi harj nahin hai. Ye jarur hai ki maine bhi kahin se ise padha tha our maine likha bhi isliye taki main iss sambandh me kuchh our jaan sakun.)
2. Aap "Gandhi ji ke bad..." ko batane ki mahatwapurn koshish kar rahe hain ( bahut-bahut thanks) aur maine bhi kuchh apni jankari se jodne ki koshish ki atah ye bat aapko nahi samajhna chahiye ki main Gandhi ji ko galat samajh raha hun. ye apag subject hoga jise ham baad me dekh sakte hain.
Swatantra Nagrik 2011-08-31 12:38:34

Jinka Gandhi khandan se koi khun ka rishta tak nahi ve desh me gandhi ke nam ka kha rahe hai. Aur asliyat jo ghandhi pariwar ke vansaj hai wo gumnami ki zindagi gujar rahe. Abhi jo Gandhi hai jise sab jante Gandhi ke naam pe apna Swarth pura kar rahe hai.
bapu hamare jan se pyare
varun 2011-10-01 13:09:43

mahatma ka khitab gandhi ji ko ravindra nath thakur ne diya tha. iska upyog gandhi ke sath achha lagta hai. bhism pitamah ke bad dusre aise insan the gandhi ji jinhone apne liye nahi dusro ke liye kiya. yani desh ke liye
god gandhi
varun 2011-10-01 13:22:32

god ko hamne kabhi dekha nhi gandhi ji ka name sun kar unki bate padh kar aisa lagta hai. ki god bhi inhi ke jisa hoga.isliye gandhi ji ko sat sat naman.
'Dharti par gandhi 1bar paida hua, jab des fir gul
shubhanshu Rs jaiswal 2011-10-02 09:08:32


Bapu hamare no. 1
Shraddha , Ujala Barabanki 2011-10-02 09:15:43

:D
Gandhi ji ki jagah koi nahi le sakta Bapu hamari a
Vaidya Radhey shyam ( vaidya 2011-10-02 09:22:04

:D :D :D
Mere pyare-pyare gandhi ji
Shubha rani 2011-10-02 09:45:59

:?: ;) :D :D :D :D :D :D :D :) ''mahatma gandhi ki jai ye nara sirf ek hi mahapurush ke liye upyog ho sakta hai jo mere hai bapu ji ,,ये एक बहुत अच्छी जानकारी है उन् लोगों के लिए जो बापू को सचमुच जानना चाहते हैं.
अन्यथा गाँधी नाम का उपयोग कर न जाने कितने ही आडम्बरी इस देश में घूम रहें हैं.
mukesh kumar 2011-10-22 17:29:26

log aj bilkun hi bhul gaya hay ki mahatama gandi kaya hay na to unhe yad kiya jata hay nahi unki kaha sunaye jati hay log ye sochte hay ki ue to ub gaye lekin ye nahi dekhte hay ki mahatma gandhi gi ugar nhi hote to na jene
ham or kitne pidhi ur gulam hi rahte

gandhi chor tha isliye koi unke pariwar ke bareme
Ravi kumar 2011-10-26 00:37:37

क्यों मुझे गाँधी पसंद नहीं है ?
1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) स ... े समस्त देशवासी आक्रोश में
थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए।
गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।

2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व
गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं,
किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग
को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों
को आतंकवादी कहा जाता है।

3. 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम
लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।

4.मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते
हुए 1921 में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी
केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग
1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस
हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में
वर्णन किया।

5.1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी
श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी
प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को
उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम
एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।

6.गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द
सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।

7.गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम
बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं
दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।

8. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।

9. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा
अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर
दिया गया।

10. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से
कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर
रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।

11. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु
गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।

12. 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक
में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ
पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था
कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।

13. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की
सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।

14. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय
पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के
सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त
करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की
मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।

15. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब
अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व
बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर
किया गया।

16. 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व
माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का
परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने
को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के
लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे
दी गयी।

17.गाँधी ने गौ हत्या पर पर्तिबंध लगाने का विरोध किया

18. द्वितीया विश्वा युध मे गाँधी ने भारतीय सैनिको को ब्रिटेन का लिए हथियार
उठा कर लड़ने के लिए प्रेरित किया , जबकि वो हमेशा अहिंसा की पीपनी बजाते है

.19. क्या ५०००० हिंदू की जान से बढ़ कर थी मुसलमान की ५ टाइम की नमाज़ ?????
विभाजन के बाद दिल्ली की जमा मस्जिद मे पानी और ठंड से बचने के लिए ५००० हिंदू
ने जामा मस्जिद मे पनाह ले रखी थी…मुसलमानो ने इसका विरोध किया पर हिंदू को ५
टाइम नमाज़ से ज़यादा कीमती अपनी जान लगी.. इसलिए उस ने माना कर दिया. .. उस
समय गाँधी नाम का वो शैतान बरसते पानी मे बैठ गया धरने पर की जब तक हिंदू को
मस्जिद से भगाया नही जाता तब तक गाँधी यहा से नही जाएगा….फिर पुलिस ने मजबूर
हो कर उन हिंदू को मार मार कर बरसते पानी मे भगाया…. और वो हिंदू— गाँधी
मरता है तो मरने दो —- के नारे लगा कर वाहा से भीगते हुए गये थे…,,,
रिपोर्ट — जस्टिस कपूर.. सुप्रीम कोर्ट….. फॉर गाँधी वध क्यो ?

२०. भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च 1931 को फांसी लगाई जानी थी, सुबह
करीब 8 बजे। लेकिन 23 मार्च 1931 को ही इन तीनों को देर शाम करीब सात बजे फांसी
लगा दी गई और शव रिश्तेदारों को न देकर रातोंरात ले जाकर ब्यास नदी के किनारे
जला दिए गए। असल में मुकदमे की पूरी कार्यवाही के दौरान भगत सिंह ने जिस तरह
अपने विचार सबके सामने रखे थे और अखबारों ने जिस तरह इन विचारों को तवज्जो दी
थी, उससे ये तीनों, खासकर भगत सिंह हिंदुस्तानी अवाम के नायक बन गए थे। उनकी
लोकप्रियता से राजनीतिक लोभियों को समस्या होने लगी थी।
उनकी लोकप्रियता महात्मा गांधी को मात देनी लगी थी। कांग्रेस तक में अंदरूनी
दबाव था कि इनकी फांसी की सज़ा कम से कम कुछ दिन बाद होने वाले पार्टी के
सम्मेलन तक टलवा दी जाए। लेकिन अड़ियल महात्मा ने ऐसा नहीं होने दिया। चंद
दिनों के भीतर ही ऐतिहासिक गांधी-इरविन समझौता हुआ जिसमें ब्रिटिश सरकार सभी
राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर राज़ी हो गई। सोचिए, अगर गांधी ने दबाव बनाया
होता तो भगत सिंह भी रिहा हो सकते थे क्योंकि हिंदुस्तानी जनता सड़कों पर उतरकर
उन्हें ज़रूर राजनीतिक कैदी मनवाने में कामयाब रहती। लेकिन गांधी दि
it,s your bad thinking
dhurvey ji 2012-01-31 21:56:17

ye bat aapki bilkul niradhar,or galat hai,yadi ye sahi hota to hum aaj bhi british sarkar k gulam hote ,Mr. Ravi kumar
मुझे आप जैसे क्यूँ पसंद नहीं हैं
Anupam Dixit 2012-02-15 15:03:39

1 - जलियाँवाला बाग कांड, रौलट एक्ट और सरकार के ज़ुल्म ही वह बिन्दु थे जिन्होंने गांधी को भारत में अपना दक्षिण अफ्रीका वाला आंदोलन चालू करने की प्रेरणा दी। किसी भी अन्याय का विरोध करने का अभी तक एक ही तरीका था - आक्रोश। यह भगत सिंह इत्यादि ने अपनाया। पर इसके सीमित लाभ होते हैं जबकि आप एक विश्वशक्ति से लड़ रहे हों। जनता आपके कार्य में सक्रिय सहयोग नहीं कर सकती क्यूंकी जान जाने का खतरा रहता है। क्या बंधुवर किसी अन्याय के विरुद्ध आप भगत सिंह वाला तरीका अपनायेंगे? या फिर आप इसे भगत सिंह के लिए ही निरापद मानते हैं ?
दूसरा तरीका गांधी जी का था जिसे 20 वर्षों तक उनहोंने दक्षिण अफ्रीका में सफलता के साथ अपनाया। यह तरीका था निष्क्रिय अहिंसक प्रतिरोध का। यह उनहोंने भारत में भी 1915 - 16 के दौरान चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में किसानों और मजदूरों के लिए लड़ कर उनका हक दिलवाया था। अहमदाबाद की हड़ताल और उसका परिणाम आज तक विश्व में हुयी हड़तालों में सबसे सफल हड़तालों में से एक है।
1919 में गांधी जी के रौलट सत्याग्रह का परिणाम यह रहा कि सरकार पीछे हट गयी और मार्शल ला पूरे देश में नहीं लगाया गया। भगत सिंह व अन्य नौजवान गांधी के साथ थे। भगत सिंह के विचार भी पढ़े।
2- भगत सिंह ने जो कुछ किया था उसके अंजाम से वे वाकिफ थे। उन्होने असेंबली में बम इसलिए नहीं फेंका था कि गांधी जी उन्हें बचा लेंगे। उनका मकसद ही था कि बम फेंक कर, गिरफ्तार हो कर, अदालत में बयान के जरिये दुनियाँ को सरकार की करतूतों के बारे में बताना। यह एक बेहद बहदुरी का काम था। अगर उन्हें बचना ही होता तो वे मुक़द्दमे के लिए वकील लेते। पर उनहों ने ऐसा नहीं किया और अपना कृत्य अदालत में मान किया। और ऐसे में फांसी के अलावा कोई सजा नहीं थी। गांधी की जी क्या कर ते जबकि स्वयं भगत सिंह ने ही ना अपील और ना ही यह चाहा। गांधी पर उंगली उठा कर आप जैसे लोग भगत सिंह कि शहादत को एक नाटक बना देते हैं जो उनहोंने शायद गांधी जी के डैम पर खेला था। ऐसा ना करें।
4। भारत में हिन्दू मुस्लिम दंगे ब्रिटिश सरकार की दें हैं। हालांकि उससे पहले भी ऐसी झड़पें होती रहीं हैं। असहयोग आंदोलन में खिलाफत के प्रश्न को शामिल कर के गांधी जी ने इन्हीं दंगों और हिन्दू मुस्लिम के बीच कि खाई को कम करने का एक अवसर पैदा किया था जो मुस्तफा कमाल पाशा के क्रांतिकारी कदम और भारत में अवसरवादी ब्रिटिश समर्थक मुसलमानों के कारण असफल हो गया। 1906 में कर्ज़न के ही द्वारा प्रेरणा पा कर मुस्लिम लीग का गठन किया गया जिसने भारत के अवसरवादी मुसलमानों को संगठित करने का प्रयास किया। मुस्लिम लीग का आरंभा से ही अजेंडा था हिंदुओं का विरोध और इसके जरिये खुद को अंग्रेजों के करीब ले जाने का। सर सैयद अहमद की सोच के अनुरूप ही ऐसा होने भी लगा और जब 1920-21 में असहयोग - खिलाफत का माहौल चला तो उसे तोड़ने के लिए ही केरल में स्थानीय लीगी नेताओं ने ऐसे दंगे कराये। केरल में एक बात और थी । किसान अधिकांश मुसलमान थे और जमींदार हिन्दू। किसानों द्वारा शोषण के खिलाफ हिंसक आंदोलन को सांप्रदायिक राग देना मुश्किल नहीं था। और रही बात गांधी द्वारा दंगाइयों को बहादुर बताने की तो अफसोस कि ऐसा कोई बयान नहीं है। यह आप द्वारा रचा गया है। जिन्हा खिलाफत के प्रश्न के बेशक विरोध में थे क्यूंकी वे गांधी जी के तौर तरीकों में भरोसा नहीं रखते थे। उनकी अपनी राजनाइटिक महत्वाकांक्षाएँ भी थीं।
बेशक गांधी जी ने मुहम्मद अली ज़िन्हा को कायदे - आजम कहा था लेकिन तब जबकि वह वाकई इस लायक थे। एक राष्ट्रवादी मुस्लिम का एक विभाजनकारी नेता में बादल जाना और एक राष्ट्रवादी कवि इकबाल का सांप्रदायिक हो जाना भारत जैसे मुल्क में सोचने लायक प्रश्न है। इसका उत्तर भी खोजिए। “सारे जहां से अच्छा” गीत तो आप गाते होंगे। हमारे राष्ट्रगान से अधिक देशबकती का संचार करने वाले गीत का रचनाकार यदि बाद में सर्वइस्लामवाद के तराने लिखे तो इसे हिंदुस्तान की क्षति ही मानना होगा।
सुभाष चन्द्र बोस का गांधी जी से विरोध राजनैतिक था व्यक्तिगत नहीं। फिर भी महान देशभक्त सुभाष अपनी विनम्रता नहीं भूले। यह सुभाष बाबू ही थे जिन्हों ने गांधी जी को राष्ट्रपिता कहा था। आप यदि सुभाष को अपना आदर्श मानते तो अपनी टिप्पणी में गांधी जी के लिए “किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था” जैसी भाषा का प्रयोग ना करते। भारतीय संस्कार यही कहते हैं कि बड़ों का नाम आदर के साथ लिया जाना चाहिए।
विभाजन के समय सम्पूर्ण जनता की अद्ल बदली अगर आप चाहते थे तो फिर वल्लभ भाई पटेल को क्यूँ पूजते हो। आखिर जब इस देश से भारी मात्र में मुसलमान पाकिस्तान जाते तो अंततः उनके रहने कि जगह और भारत के संसाधनों में भी बंटवारा होता। जिन्नाह यही चाहते थे। आप जैसे अकाल के अंधे उनकी इस चालक मांग में साथ देते और भारत को भी अफ्रीका या इस्रायल फलसतीन बना देते।
सैनिकों को लड़ने के लिए प्रेरित किया 1919 से पहले। उसके बाद नहीं। अहिंसा का अर्थ कायरता नहीं। दूसरा विश्व युद्ध फासीवादी युद्ध था। हिटलर के नापाक इरादे दुनियाँ को गुलाम बनाने के थे। ब्रिटेन का साथ देना ही न्यायपूर्ण था। उस समय भारत में रोजगार का एक ही विकल्प था सेना। और देशवासी खास कर पंजाब और नेपाल से बड़ी संख्या में सेना में शामिल हुये। गांधी के कहने से नहीं।
अन्य बिन्दुओं को आपने संदर्भों से काट कर रख दिया है। आशा है आपके डिमगों के जाले साफ कर पाया हूँ।

gandhi
lucky 2012-04-14 12:39:10

gandhi ka photo crancy me se hta do............. :angry-red: :evil: :idea: :love:
Anonymous 2011-11-05 18:02:08

:ooo:
diwakar
neel chand diwakar 2011-11-28 23:43:44

mai chahta hu ki gandhiji ki wansaj sambandhat aur jankari dewe....................
neel chand diwakar 2011-11-28 23:46:00

:D Acchi jankari ke liye shukriya.
asdfjk
ashwani sahu 2012-01-24 16:11:18

mahatma gandhi ek mahan purush te :love: :love:
man of the india
ruchi 2012-02-08 22:04:23

gandhi ji is a man of india and bapu ek mahan puros hai
५५ कोटि
Amit. 2012-02-14 18:07:49

सबके विरोध के बाद भी आहिंसा की नाम पर पाकिस्तान को ५५ कोटि देने के लिए मजबूर करनेवाला ये ही गाँधी , महान कैसा ? ये इक अपनी खुद की चमड़ी बचानेवाला आदमी था.
Dr. Yogendra Yadav
Dr. Yogendra Yadav 2012-03-24 10:31:07

Gandhi Parivar ke logo ko Mahatma Gandhi ke tyak maye jivan se shichha le kar desh aur vishwa ke kalyan ke liye kuchh karna chahiye. jisase aaj ke log unke sath andolan ke sath jud kar desh ko vikas se jod sake.
prem sagar 2012-04-07 14:39:10

mahatma gandhi kao bapu kisne kaha tha kripya hame btane ka kast kare
mahatma gandhi ko bapu kisne kaha tha
prem sagar 2012-04-07 14:40:24

hame bataye
Anonymous 2012-05-11 22:19:13

:D gandhi ke vanshaj gandhi ki schai jante the aaur bharat aaker apni beijjti nahi karana chahte hai
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