मनुवाद के उग्र व रक्तरंजित विरोध पर मायावती को सोचना होगा

सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय का सिद्धांत ही मायावती के लिए सुखमयकारी, राजनीतिक शक्ति हासिल करने क लिए अच्छा रहेगा। मनुवाद का अत्यधिक रक्तरंजित विरोध नुकसानकुन है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि रक्तरंजित हिन्दू विरोध से भी मायावती नुकसान में ही रहेगी। इसलिए कि दलित और पिछडों की अधिकतर जातियां और लोग हिन्दुत्व से आज भी जुडे हुए हैं। अत्यधिक और रक्तरंजित हिन्दू विरोध से अगडी और वैश्य जातियां ऐसे भी मायावती के विरोधी रही हैं। मायावती को अब हिन्दुत्व आधारित रक्तरंजित विरोध की राजनीति छोडनी चाहिए।विष्णुगुप...

संजयलीला भंसाली को इतिहास से खिलवाड़ का हक नहीं

फिल्मकार संजयलीला भंसाली के साथ दुर्व्यवहार निश्चय ही दुर्भाग्यपूर्ण है। किन्तु ऐतिहासिक तथ्यों और लोकमान्य प्रेरणादायक राष्ट्रीय विभूतियों की छवि विकृत करना भी एक सामाजिक अपराध है। यह आवश्यक है कि कवि-कथाकारों और कलाकारों को अपनी कल्पना शक्ति के आधार पर रचना को अधिक से अधिक कलात्मक बनाने की छूट दी जानी चाहिए किन्तु इसका यह अर्थ नहीं कि रचनाकार इतिहास के तथ्यों और स्वीकृत सत्यों को ही उलट कर रख दे। फिल्म ‘पद्मावती’ में महारानी पद्मावती को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका बताया जाना भी ऐतिहासिक तथ्यों...

क्रांति अभी कोसों दूर है

(अनुवादकीय नोट : यद्यपि मीरा नंदा ने यह लेख 2007 में मायावती के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के समय तहलका मैगज़ीन में अंग्रेजी में लिखा था परन्तु इसमें उसने मायावती की सर्वजन की राजनीति से उपजे जिन खतरों और कमजोरियों को डॉ. आंबेडकर के माध्यम से इंगित किया था, आज वे सभी सही साबित हुयी हैं. मायावती हिंदुत्व को रोकने में सफल होने की बजाये स्वयम उसमें समा गयी है. मीरा नंदा की अम्बेडकरवाद की समझ बहुत गहरी और व्यापक है.- एस.आर. दारापुरी) मायावती के चुनाव अभियान में भीम राव आंबेडकर का नाम बार बार आता है ....

यूं ही नहीं हुई सहारा में क्रांति!

लखनऊ में सहारा कर्मियों ने जिस जज्बे के साथ अपने हक की आवाज उठाई है, वह काबिलेतारीफ है। कर्मचारियों का हक मारकर गरीब जनता की खून-पसीने की कमाई पर बाबा रामदेव के साथ मिलकर धंधा कर रहे ओपी श्रीवास्तव के घर का घेराव कर उसे भी तेवर दिखा दिये गए। नोएडा परिसर से उठी बगावत की चिंगारी अब पूरे देश में आग का रूप ले चुकी है। यह वही संस्था है जिसमें डंडे के जोर पर कर्मचारियों से जहां चाहे हस्ताक्षर करा लिए जाते रहे हैं। चाटुकारिता की सभी हदें पार की जाती रही हैं। हक की आवाज को दमन के बल पर दबा दिया जाता रहा...

मोदी-योगी युग में किसानों की बल्ले-बल्ले

अजय कुमार, लखनऊउत्तर प्रदेश में सत्ता परिर्वतन किसानों के लिये खुशियों की सौगात ले कर आई है। चुनावी प्रचार के दौरान पीएम मोदी के किसानों से किये गये वायदे के अनुसार लघु और सीमांत किसानों का कर्जा माफ होने के साथ यूपी के नये सीएम योगी आदित्य राज ने किसानो का सौ फीसदी गेहूं खरीदने की घोषणा कर दी है। गेहूं खरीद का पैसा सीधे किसानों के खाते में जायेगा। योगी सरकार के द्वारा गन्ना किसानों को उनका भुगतान जल्द से जल्द दिलाये जाने की कोशिश हो रही है। योगी सरकार केन्द्र की उन योजनाओं को भी जल्द से जल्द जम...

शिक्षा का गिरता स्तर, नैतिक पतन पैदा कर रहा ‘रोमियो’

सुमंगल दीप त्रिवेदीयूपी में सरकार बदलने के बाद से एक शब्द लगभग हर एक सख्श की जुबान पर आ रहा है, वह है ‘रोमियो’। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्कूली छात्राओं, बालिकाओं एवं युवतियों से आये दिन होने वाली बदसलूकी, छींटाकशी पर विराम लगाने के उद्देश्य एवं महिलाओं के प्रति बढ़ रही आपराधिक वारदातों पर विराम लगाने की मंशा से सूबे के नये मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने पुलिस विभाग को निर्देशित किया। फलस्वरूप, गठन हुआ ‘एंटी रोमियो स्क्वैड’।

गाय से प्रेम, हूरों के सपने और सुसाइड बॉम्बर

Tabish Siddiqui : कामसूत्र भारत में लगभग 300 BC में लिखी गयी.. उस समय ये किताब लिखी गयी थी प्रेम और कामवासना को समझने के लिए.. कामसूत्र में सिर्फ बीस प्रतिशत ही भाव भंगिमा कि बातें हैं बाक़ी अस्सी प्रतिशत शुद्ध प्रेम है.. प्रेम के स्वरुप का वर्णन है.. वात्सायन जानते थे कि बिना काम और प्रेम को समझे आत्मिक उंचाईयों को समझा ही नहीं जा सकता है कभी.. ये आज भी दुनिया में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली किताबों में से एक है

मैडम जी बोलीं- 'यू नो, उर्दू इज़ अ वेरी ब्यूटीफुल लैंग्वेज!'

Yashark Pandey : बंगाली फ़िल्मकार सृजित मुखर्जी की एक पिक्चर है: 'राजकाहिनी'। दो साल पहले इसका ट्रेलर देखा था तो रोंगटे खड़े हो गए थे। टैगोर के गीत 'भारत भाग्य विधाता' की उन सभी पंक्तियों को- जो राष्ट्रगान में सम्मिलित नहीं हैं- बड़ी खूबसूरती से फिल्माया गया है। ट्रेलर में पूरा गीत किसी एक ने नहीं गाया बल्कि विभिन्न बंगाली गायकों की आवाज में गीत की हर पंक्ति अंदर तक झकझोर देती है। राजकाहिनी की कहानी यही है कि देश विभाजन के समय सरकारी आदेश से एक वेश्यालय को तोड़ा जाना है जो बदकिस्मती से भारत पाकिस्ता...

UGC की अनुदान कटौती है बहाना, JNU और TISS है निशाना

देश की चौथे नम्बर की सबसे बढ़िया जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की रिसर्च की सीटों में भारी कटौती के बाद अब TISS (Tata Institute of Social Sciences) पर सरकार हमला कर रही है। इस संस्थान के 25 टीचर्स को यूजीसी द्वारा अनुदान कटौती के कारण नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है। TISS के शिक्षकों और छात्रों द्वारा सरकार की कई नीतियों की आलोचना होती रही है। मुम्बई में कुछ महीने पहले आयोजित 'मुम्बई कलेक्टिव' कार्यक्रम के आयोजन में TISS के छात्रों और कुछ शिक्षकों का बड़ा हाथ था। JNU और रोहित वेमुल्ला की आत्महत्या...

मोदी युग की प्रचंडता : ...सुना है, हवाएं तुम्हारे शहर से होकर आ रही हैं!

जैसे- जैसे-जैसे साल 2016 गुजरा, सत्ता के गलियारों में शतरंज की बिसात अपने नए रंग में आ गई| केंद्रीय सत्तासीन दल भाजपा और विपक्ष में कांग्रेस सहित सपा, बसपा आदि के राजनीतिक पंडित अपनी-अपनी गोटियां उत्तरप्रदेश में फिट करने को उतारू हो चले थे| जी हां, साल 2017 देश के सबसे बड़े राज्य के विधानसभा चुनाव का साक्षी बना और उत्तरप्रदेश की राजनीति के बारे में एक कहावत प्रचलित भी है कि "यूपी की राजनीतिक बिसात ही केन्द्रीय कद का खाका तय करती है|" अक्षरस: सत्य भी है, लोकसभा चुनावों में भी अमित शाह का उत्तरप्र...