मुख्य बात
 

छिलके के नीचे छिलका : काक-कोकिला संवाद

स्वच्छ भारत का एक महानगर। पूरी तरह स्मार्ट सिटी। जगह-जगह कचरे के ढेर। जगह-जगह बन्द शौचालय, जिनके आसपास भयानक दुर्गन्ध। खुले में शौच करने की कोई सुविधा नहीं। दूर-दूर तक कोई फलदार वृक्ष नहीं।  प्यासों को पीने के लिए मुफ्त पानी कहीं उपलब्ध नहीं। न मनुष्...

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पाकिस्तानी सारा संग अध्ययन की ‘इश्क क्लिक‘

प्रभुनाथ शुक्ल

वालीवुड के बड़े पर्दे पर ‘लव‘ पर आधारित ‘इश्क क्लिक‘ 22 जुलाई को पूरे देश भर के सिनेमा घरों में रीलिज होने जा रही है। फिल्म का टेलर और म्यूजिक टीवी चैनलों और यूट्यूब पर धमाल मचा रहा है। फिल्म का प्रोमो और गीत ‘माना तुझी को खुदा‘ खूब चर्च...

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मोदी सरकार : गैरों पे करम, अपनों पे सितम! श्रम कानून सख्त करो

मोदी सरकार श्रम कानूनों में बदलाव करने जा रही है और इस बदलाव के कारण किसी को नौकरी से निकालना आसान हो जाएगा। वो भी बिना छंटनी मुआवजा दिए किसी की भी छंटनी कर दी जाएगी. प्राइवेट सेक्टर में यूनियन नहीं बन पाएगा और ना ही मांगों को लेकर हडताल होगा। मैं तो...

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चैनल चला रहा है आरएब्ल्यूए का प्रेसिडेंट

एक दर्जन से ज्यादा लोगों का इस्तीफा.... यूपी/उत्तराखंड चैनल के तथाकथित आउटपुट इंचार्ज और अपने सोसाइटी के RWA प्रेसिडेंट से परेशान हो कर पिछले कुछ दिनों में एक दर्जन से ज्यादा लोगों ने इस्तीफा दे दिया है। इससे ठीक पहले चैनल का पूरा ग्राफिक्स डिपार्टमे...

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अमर बेल की चपेट में मुलायम परिवार

किसी समय समाजवादी पार्टी में पूरी तरह से दखल रखने वाले राज्यसभा सदस्य अमर सिंह की दूसरी पारी में नहीं चल पा रही है तो वह कुछ न कुछ तो जरूर करेंगे। कैसे पार्टी में उनका हस्तक्षेप बढ़े, कैसे वह पुराना रुतबा कायम करें। इसी उधेड़बुन में वह पूरी से लगे हुए ...

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शहाबुद्दीन के नाम एक खुला खत

An open letter to shahabuddin.... मोहम्मद शहाबुद्दीन, माफ़ कीजियेगा आदरणीय के लायक आप हैं नहीं, और आपको सर, साहब और जी कहने का अधिकार तो सिर्फ आपके चमचों, आपके गुर्गे के लोग और आपसे वोट बैंक की उम्मीद रखने वालों के पास है. शहाबुद्दीन, सबसे पहले आपको ब...

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क्या इसके बाद भी हम सुरक्षित रहेंगे?

"फ्रांस के साथ 7.8 बिलियन यूरो यानि करीब 59 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे के तहत भारत को 36 रॉफेल लड़ाकू विमान हासिल होगा"। लीजिए, शुरू हो गया 21वीं सदी के महान मानवीय सभ्यताओं के बीच व्यापार। यह हास्यास्पद है और हास्यास्पद ही नहीं बल्कि मजाक है। मजाक ...

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मुक्तिबोध का वैश्विक दृष्टिकोण : सन्दर्भ और महत्त्व

हिन्दू कालेज में मुक्तिबोध पर व्याख्यान : मुक्तिबोध की पेचीदा भाषा में हम अपनी दुनिया को समझ सकते हैं। वे इसी पेचीदा भाषा में आधुनिकता को देख रहे हैं, फासीवाद को देख रहे हैं और आगे की दुनिया को दिखा रहे हैं। मुक्तिबोध का संदर्भ स्वातन्त्र्योत्तर है। ...

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गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा भारतीय अर्थव्यवस्था पर भारी

भोपाल ! भारत के प्रधानमंत्री के समक्ष भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती पर अमेरिका निवेशक और पुस्तकों "रिच डेड पुअर डेड" सीरीज के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने अपने बेंगलुरू में वक्तव्य में कहा कि नरेंद्र मोदी एक तेज तर्रार प्रधानमंत्री हैं, ले...

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भावनाओं की राजनीति वामपंथियों से ज्‍यादा भला किसने की है?

- डॉ. मयंक चतुर्वेदी -

वैसे तो हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता लेकिन जब बात सार्वजनिक हो जाए और खासतौर से वह आधुनिक जमाने की सोशल मीडिया का हिस्‍सा बन जाए तो खड़े किए गए प्रश्‍नों का प्रति उत्‍तर देना जरूरी हो जाता है। दूसरी दृष्‍ट‍ि से देखें तो यह ...

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